इश्क़ का बेआवाज़ दरिया
इश्क़
एक बेआवाज़ दरिया है
जो दिल की ज़मीन के नीचे
चुपचाप बहता रहता है।
न उसकी लहरें सुनाई देती हैं,
न उसका शोर कहीं उठता है
मगर रूह की प्यास
उसी से बुझती है।
और जो एक बार
उस दरिया तक पहुँच जाए
वो उम्र भर
उसकी ख़ामोश रवानी में
भीगता रहता है।
मुकेश ,,,,
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