“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
रात अगर दिल पर उतर आए,
चाँद से थोड़ी रोशनी लिया कर।
अगर तन्हाई बहुत सताने लगे, तू यादों से बात किया कर।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,
No comments:
Post a Comment