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Wednesday, 11 March 2026

ठहरी हुई शाम का रहस्य

 ठहरी हुई शाम का रहस्य


कभी-कभी

शाम अचानक

रुक-सी जाती है,

जैसे समय

अपनी चाल भूल गया हो।


आसमान के रंग

धीरे-धीरे गहरे होते हैं,

और धूप

पेड़ों की शाखों में

किसी आख़िरी किरण की तरह

ठहर जाती है।


उस क्षण

दुनिया भी

थोड़ी धीमी हो जाती है—

सड़क की आवाज़ें

मद्धम पड़ जाती हैं,

पक्षियों की उड़ान

अपने घरों की ओर मुड़ जाती है।


ऐसा लगता है

जैसे प्रकृति

दिन और रात के बीच

एक मौन संवाद लिख रही हो।


शाम का यही रहस्य है

वह न पूरी रोशनी है,

न पूरा अँधेरा।


वह बस

एक पुल है

जहाँ समय

कुछ पल के लिए

अपने ही कदमों को सुनता है।


और जो आदमी

उस ठहरी हुई शाम में

थोड़ी देर रुककर देख ले,

उसे समझ में आता है

कि जीवन भी

शायद ऐसा ही है,


रोशनी और अँधेरे के बीच

ठहरा हुआ

एक छोटा-सा रहस्य


मुकेश ,,,,,

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