फूलों में छुपा हुआ तुम्हारा अक्स
बगीचे में डहलिया
धीरे-धीरे अपनी रंगत खोल रहे थे
लाल, पीला, बैंगनी, सफ़ेद—
हर पंखुड़ी में जीवन की छोटी-छोटी चमक।
मैं उनके पास खड़ा रहा
और देखा,
हर फूल में कुछ अलग सा है,
कुछ ऐसा जो सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है।
तभी अचानक
तुम याद आ गई
और लगा कि
हर पंखुड़ी में
तुम्हारा अक्स छुपा है।
तुम्हारी मुस्कान की गर्माहट
लाल फूलों की आग में,
तुम्हारी नर्म छाया
सफ़ेद पंखुड़ियों की कोमलता में,
तुम्हारी गहराई
बैंगनी की छाया में,
और तुम्हारा आनंद
पीले की हल्की धूप में।
फूलों ने अपनी खुशबू बिखेरी,
हवा ने उनके रंग खेलाए,
पर तुम्हारा अक्स
सबसे साफ़ और नाज़ुक
उनमें चमकता रहा।
और मैं समझ गया
कुछ यादें और कुछ लोग
फूलों में भी उतर आते हैं,
और वहां
हमेशा के लिए खिलते रहते हैं।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,
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