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Wednesday, 18 March 2026

जलता हुआ सूरज और नाचती हुई धरती

 जलता हुआ सूरज और नाचती हुई धरती


जलता हुआ सूरज

आसमाँ के सीने पर

धीरे-धीरे चढ़ता है

जैसे कोई जुनून

अपने शबाब पर हो।


और नीचे

नाचती हुई धरती

उसकी हरियाली, उसकी धूल,

उसकी साँसों की लय

उस आग के साथ

ताल मिला रही है।


हवा भी

गर्म लहरों में बदलकर

एक अजीब-सी धुन छेड़ती है,

जिस पर

पेड़, परिंदे, रास्ते

सब झूम उठते हैं।


कभी लगता है

ये तपिश नहीं,

मोहब्बत की कोई शिद्दत है

जिसमें सूरज जलता है,

और धरती

उसकी आग में

मुस्कुराते हुए नाचती है


मुकेश ,,,,,,,,,

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