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Thursday, 5 March 2026

प्रतीक्षा

 प्रतीक्षा

प्रतीक्षाएँ

घड़ियों से पैदा नहीं होतीं,

दरअसल वे

उम्मीद की कोख से जन्म लेती हैं।


हर प्रतीक्षा का अपना समय होता है,

और हर समय का

अपना खुलना।

साथ बाँध कर लाई गई घड़ी

अक्सर धोखा दे जाती है—

दिल की सुइयाँ

अपने ही ढंग से चलती हैं।


मुकेश ,,,,,,,,,,,

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