दूरी की गहराई
दूरी सिर्फ़ फ़ासला नहीं होती,
वह एक और तरह की नज़दीकी होती है
जहाँ छूना मुमकिन नहीं,
पर महसूस करना और गहरा हो जाता है।
तुम दूर गए,
तो लगा जैसे सब खाली हो गया,
पर धीरे-धीरे समझ आया
खालीपन भी तुम्हारे होने का
एक नया तरीका है।
पहले
तुम सामने थे,
तो नज़रें भर जाती थीं
अब तुम नहीं हो,
तो यादें भर जाती हैं।
यह कैसी दूरी है
जो कम नहीं करती,
बल्कि बढ़ा देती है
हर एहसास को,
हर धड़कन को।
कभी-कभी लगता है
तुम जितने पास थे,
उससे ज़्यादा अब हो
क्योंकि अब तुम
किसी जगह में नहीं,
मेरे भीतर रहते हो।
दूरी ने
तुम्हें मुझसे छीना नहीं,
बस तुम्हें
मुझमें गहरा कर दिया है।
इसलिए अब
जब कोई पूछता है—
“कितनी दूर हो तुम उससे?”
मैं मुस्कुरा देता हूँ,
क्योंकि ये दूरी
नापी नहीं जाती—
ये तो बस
उतनी गहरी होती है
जितना गहरा
प्रेम होता है।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,
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