समुद्र के किनारे शाम
(अर्नेस्ट हेमिंग्वे की शैली से प्रेरित एक नज़्म)
शाम धीरे-धीरे
समुद्र पर उतर रही थी।
एक बूढ़ा आदमी
किनारे बैठा
पानी को देख रहा था।
लहरें आती थीं,
फिर लौट जाती थीं।
बहुत-सी चीज़ें
ऐसी ही होती हैं।
उसके पास
एक पुरानी टोपी थी,
एक खाली बोतल,
और कुछ यादें
जिन्हें अब वह नाम नहीं देता था।
दूर कुछ लड़के
हँसते हुए भागे।
वह उन्हें देखता रहा।
उसे याद नहीं आया
कि वह भी कभी ऐसा था या नहीं।
हवा में नमक था।
उसने जेब से
मुड़ी हुई तस्वीर निकाली।
कुछ देर देखी।
फिर वापस रख ली।
समुद्र के सामने
आदमी अक्सर कम बोलता है।
क्योंकि वहाँ
हर सवाल
बहुत छोटा लगने लगता है।
अँधेरा थोड़ा और बढ़ा।
बूढ़ा आदमी उठा,
धीरे-धीरे चला
और पीछे मुड़कर नहीं देखा।
समुद्र अब भी वहीं था।
जैसे कुछ चीज़ें
हमारे चले जाने के बाद भी
बिना दुख के बनी रहती हैं।
अर्नेस्ट हेमिंग्वे का संक्षिप्त परिचय
अर्नेस्ट हेमिंग्वे विश्व साहित्य के अत्यंत प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक थे। उनका जन्म 1899 में अमेरिका में हुआ और 1961 में उनका निधन हुआ।
हेमिंग्वे अपनी संक्षिप्त, सीधी और प्रभावशाली लेखन-शैली के लिए जाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में कम शब्दों में गहरी भावनाएँ और मनोवैज्ञानिक तनाव व्यक्त होता है। इसे “Iceberg Theory” कहा जाता है — जहाँ कहानी का अधिकांश अर्थ सतह के नीचे छिपा रहता है।
उनकी प्रमुख कृतियों में The Old Man and the Sea, A Farewell to Arms, For Whom the Bell Tolls और The Sun Also Rises शामिल हैं।
1954 में उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उनकी रचनाओं में अकेलापन, साहस, असफलता, युद्ध और मनुष्य की आंतरिक दृढ़ता बार-बार दिखाई देती है।
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