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Thursday, 4 June 2026

शब्द मेरे पास आते रहे

 शब्द मेरे पास आते रहे

जैसे प्यासे पक्षी
किसी सूखती हुई झील पर उतरते हैं

मैं उन्हें पानी समझता रहा

वे मुझे सांत्वना देते रहे

पर एक दिन जाना

कि शब्द प्यास नहीं बुझाते

वे सिर्फ यह बताते हैं

कि भीतर कहीं
अब भी एक प्यास बाकी है

जिसका नाम लेना भी
कई बार संभव नहीं होता।

मुकेश ,,,,,,,,,,

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