वफ़ा जिनकी आखों में थी वो रहे उम्र बहर परदे में,






वफ़ा जिनकी आखों में थी वो रहे उम्र बहर परदे में,
जो बेवफा थे कम से कम हमसे मिलने तो आये !!!
मुकेश इलाहाबादी ----------------------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है