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Monday, 15 April 2013

एक और गंगा बहा दो




पिता को
तो पूछते नहीं
पुरखों को
कौन पूजता है ?
आज के यूग मे
भागीरथ कंहा होता है ?
लिहाज़ा
शंकर तुम,
अपनी जटाओ से
एक और गंगा बहा दो 
ये गंगा मैली हो चुकी है
इसको हटा लो
सूख चुके हैं
लोगों के ह्रदय भी
हो सके तो
प्रेम गंगा भी बहा दो
शंकर , तुम
एक और गंगा बहा दो
मुकेश इलाहाबादी ---------------


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