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Tuesday, 9 April 2013

कश्तियों के पाल सम्हलते नही

 
कश्तियों के पाल सम्हलते नही
हवाओं के रुख भी बदलते नहीं
ज़िन्दगी से कर लिया किनारा
अब किसी बात से डरते नही
लहरें रह रह के सर पटकती हैं
ये बात साहिल समझते नहीं
डूब के क्या करोगे मुकेश,अब 
समंदर से मोती निकलते नही
 
मुकेश इलाहाबादी -------------

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