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Monday, 8 April 2013

एक टुकडा धुप


एक टुकडा धुप
प्यार की ज़मी  मे
बो आया हूँ
अब,
देखना
एक दिन
चाँद उगेगा !!!

तुम भी,
कुछ एहसास के बीज
ले  जाओ
तुम्हारे आँगन भी 
मुहब्बत की
बगिया लहलाहायेगी
मुकेश इलाहाबादी ------------------


1 comment:

  1. बस यही तो बात है एहसास के बीज ले तो जाओ !

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