धूप का टुकड़ा भी आखिर मचल गया

धूप का टुकड़ा भी आखिर मचल गया
फूल बन कर गालों पे खिल गया
मुकेश इलाहाबादी ------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

हरिवंश पुराण - तृतीय खंड — भाग 26 - द्वारका का विस्तार

हरिवंश पुराण - भाग ३० — बाणासुर :