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Sunday, 20 July 2014

तेरी आखों का काजल बन जाऊं

तेरी आखों का काजल बन जाऊं
इन होठों की मुस्कान बन जाऊं

सफर में तो धुप होगी ही तेरे लिए
ज़ुल्फ़ों की ये घनी छाँव बन जाऊँ

तेरा आँचल क्यों रहे सादा - सादा
चाँद सितारे आसमान बन जाऊँ

तू गुमसुम न रहा कर, तेरे लिए
मै दुनिया की सौगात बन जाऊँ

तुझे खूबसूरत ग़ज़ल बना कर
और मै खुद प्रेम राग बन जाऊं 

मुकेश इलाहाबादी --------------