की जिसने बेवफाई, खासदार निकला

की जिसने बेवफाई, खासदार निकला
जेब से दोस्त के खंज़र धारदार निकला

महफ़िल में पैरहन सबने उजले पहने थे 
दामन मगर हरएक का दागदार निकला

ले गए जिसको अपनी गवााही के वास्ते
वही शख्श दुश्मन का तरफदार निकला

हम जिसे अब तक मासूम समझते रहे,,
ईश्क के मामले में वो बरखुदार निकला 

ज़माना नातजुर्बेकार माना गया मगर 
मुकेश आदमी बड़ा समझदार निकला 

मुकेश इलाहाबादी -----------------------

हैं निशार हम उनकी उन्ही अदाओं पे  
जिन अदाओं ने हमारी जाँ तक ले ली

मुकेश इलाहाबादी ---------------------

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