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Thursday, 4 September 2014

बुते संगमरमर में ख़ुदा ढूंढ रहे हो

GIRAH------------------------------

बुते संगमरमर में ख़ुदा ढूंढ रहे हो
आईने में पत्थर की अदा ढूंढ रहे हो

यंहा सभी पत्थर दिल रहा करते हैं
यार तुम भी मुहब्बत कहाँ ढूंढ रहे हो

जिनकी आखों में रेत् के समंदर हैं
उन आखों में अपना जहाँ ढूंढ रहे हो

यूँ शहर -शहर दर-ब-दर भटकते हुए
अपनी मुहबबत का पता ढूंढ रहे हो ?

जो इक बार धोखा दे चुका है तुम्हे
मुकेश तुम उसी में वफ़ा ढूंढ रहे हो

मुकेश इलाहाबादी ---------------------

‘MISRA-E-SANI’... आईने में पत्थर की अदा ढूंढ रहे हो
Janaab Manohar Manu Gunavi Sahib KI KHOOBSURAT GHAZAL
KE EK SHER SE LIYAA GAYAA HAI .....