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Saturday, 6 June 2015

रोशनी कुछ इस तरह किया जाये

रोशनी कुछ इस तरह किया जाये
बुझा के चराग़ चाँद उगा दिया जाए

मुहब्बत की आग और भड़काता है
कि चेहरे से नक़ाब हटा दिया जाये

मेरे हाथों से सारी लकीरे मिटा कर
सिर्फ महबूब का नाम  लिखा जाए

उसने मेरी मुहब्बत क़ुबूल कर ली
उसके  साथ  मेरा नाम लिया जाए

किताबे ज़ीस्त में उसका ही नाम हो
मुकेश, बाकी  हर्फ़ मिटा दिया जाये 

मुकेश इलाहाबादी --------------------

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