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Wednesday, 17 August 2016

तू फूल की मानिंद खिल और खुशबू सा महक

तू फूल की मानिंद खिल और खुशबू सा महक
या परिंदा बन कर , मुंडेर पे बुलबुल सा चहक

वज़ूद में अपने यूँ बर्फ सा ठंडापन मत रख तू
पहले शोला बन फिर अंगारा सा देर तक दहक

मेरी चाहत है तू इक दिन तू महताब बन जाये
चाँद बन कर मेरी अंधेरी स्याह रातों में चमक

मुकेश इलाहाबादी ---------------------------------