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Friday, 2 September 2016

कोई छुट्टी नहीं होती

कोई
छुट्टी नहीं होती
कोई इतवार नहीं होता
तुम्हरी यादों का
कोई नागा नहीं होता

और, मैं भी तो
बिना थके
बिना रुके
बिना झुंझलाए
रहता हूँ
तुम्हरी यादों के संग

सुमी,,

मुकेश इलाहाबादी ----