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Thursday, 22 June 2017

रोशनी के लिए चाँद है सितारे हैं

रोशनी के लिए चाँद है सितारे हैं
फूलों की छत खुशबू की दीवारे हैं

सोने चांदी का इक बाग़ सुनहरा
बाहों की सेज़  वफ़ा की मीनारे हैं

तुमको खुशनुमा मौसम मिलेगा
मेरा घर ईश्क़ की नदी,किनारे है

अब तू ही मेरा दरिया तू ही नाव
मेरा जीवन अब तेरे ही सहारे है

मुकेश इलाहाबादी --------------