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Tuesday, 11 July 2017

बेवज़ह दिल मेरा जलाया न कर

बेवज़ह दिल मेरा जलाया न कर
बात बात पे खिलखिलाया न कर

देखती नहीं मै ग़मज़दा ज़माने से
तू ज़ालिम सा मुस्कुराया न कर

गर तुझे मुझसे मुहब्बत नहीं तो
रोज़ रोज़ तू मुझसे मिला न कर

मुझको ये नाज़ो नखरे पसंद नहीं
बात बात पे, प्यार जताया न कर

मुझको न 'मय' पसंद न मैखाना
यूँ आँखों से जाम पिलाया न कर

मुकेश इलाहाबादी --------------