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Wednesday, 20 September 2017

झूला

रस्सी
का एक छोर तुम्हारे शहर से होते हुए
तुम्हारी छत के कुंडे से लगा हो
और दूसरा छोर मेरे घर की कुंडी से
बीच में मुहब्बत की पाटी लगी हो
और झूल रहे हों हम दोनों
झूला ईश्क़ का

मुकेश इलाहाबादी --------------------

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