होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Thursday, 25 June 2020

तुम खिलखिलाओ मै तुम्हे देखूँ

तुम खिलखिलाओ मै तुम्हे देखूँ
मेरे पास बैठो और तुम्हे मह्सूसूँ
किसी रोज़ अपनी चुप्पी तो तोड़ो
तुम बोलो और तुम्हे देर तक सुनूँ
अपनी हिरणी सी आँखें ले के आ
तुझको जी भर देखूँ गज़ल लिखूँ
ज़िंदगी कुछ पल मोहलत दे तो
खल्वत में बैठूँ सिर्फ तुझे सोंचू
मुकेश बेतरह जल रहा कब से मै
कभी तो बदल सा बरस मै भीगूँ
मुकेश इलाहाबादी -----------

No comments:

Post a Comment