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Tuesday, 5 January 2021

मेरे पास पर नहीं उड़ सकता नहीं

 मेरे पास पर नहीं उड़ सकता नहीं

चाँद है कि फलक से उतरता नहीं
एक मै मनाने का हुनर आता नहीं
एक वो रूठ जाए तो मानता नहीं
पहले उसी ने कहा आ सैर पे चलें
अब मै राजी हुआ तो चलता नहीं
खामोश हो जाये तो बोलता नहीं
बोलने पे आये तो चुप रहता नहीं
जो पूछता हूँ मुझे प्यार करते हो
बस मुस्कुराता है कुछ कहता नहीं
मुकेश इलाहाबादी ------

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