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Tuesday, 2 February 2021

फलक तक उड़ कर गया

 फलक तक उड़ कर गया

चाँद हया से छुप गया
वो तितली बन के आयी
मै फूल बन खिल गया
साथ तो दूर तक का था
बीच राह में वो मुड़ गया
इश्क़ में था तो दरिया था
मुद्द्त हुई बर्फ बन गया
जो लोहा कुदाल में था वो
आज तमंचे में ढल गया
मुकेश इलाहाबादी -----

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