अभी हार नहीं मानी है

 अभी हार नहीं मानी है

जंगे ज़िंदगी जारी है
न चाँद है न सूरज है
बाहर अँधेरा तारी है
घाव भर गया लेकिन
निशान अभी बाकी है
तू चली गयी है मगर
तेरी याद नहीं जाती है
मुकेश इलाहाबादी ---

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