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Friday, 20 February 2026

अक्सर कोई दिन बेहूदा होता है

 अक्सर कोई दिन बेहूदा होता है 

अक्सर कोई दिन
बेहूदा होता है—
बिन वजह भारी,
बिन वजह फीका।

सुबह का उजाला भी
थका हुआ लगता है,
और दिल
किसी अनजानी खामोशी से भर जाता है।

पर शाम को
एक छोटी-सी रोशनी
धीरे से याद दिलाती है—
बेहूदा दिन भी
ज़िंदगी का हिस्सा हैं।

 मुकेश इलाहाबादी

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