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Friday, 20 February 2026

कुछ सूफ़ियाना त्रिवेणियाँ — अलग विषयों पर, रूहानी स्वाद के साथ



वक़्त

वक़्त ने मेरे हाथों से सब कुछ छीन लिया,

पर एक लम्हा तेरे ज़िक्र का छोड़ गया,


अब वही सदियों पर भारी है।


तन्हाई

तन्हाई को जब मैंने दिल में जगह दी,

वो दुश्मन से दोस्त बन गई,


अब हर ख़ल्वत में रब की आहट है।


सफ़र

मैं चला तो था किसी और मंज़िल की ओर,

रास्ते ने मुझे ही मुझसे मिला दिया,


अब हर क़दम लौटना-सा लगता है।


आईना

आईने में देखा तो चेहरा मेरा था,

पर नज़र में कोई और ठहरा हुआ,


मैंने पहचान से आगे देखना सीख लिया।


दर्द

दर्द ने दस्तक दी तो दरवाज़ा खोल दिया,

वो मेहमान बनकर नहीं, मुर्शिद बनकर आया,


अब हर ज़ख़्म में तालीम है।


मोहब्बत

मोहब्बत को चाहा तो वो दूर भागी,

जब छोड़ दिया, तो रग-रग में उतर आई,


अब पाने और खोने का फ़र्क़ मिट गया।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,, 


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