लॉन्ग डिस्टेंस रिश्ते : तकनीक और तड़प
हम दो जगहों में रहते हैं,
पर एक ही धड़कन में बँधे हुए।
तुम मेरी स्क्रीन की चमक में हो,
मैं तुम्हारी यादों की धुंध में।
अक्षरों की कतारों में
हम अपने नाम तलाशते हैं,
इमोजी की हँसी
हमारे हृदय की हलचल बन जाती है।
हर “हेलो”
एक छोटी-सी नाव है,
जो तुम्हारे तट तक
अपनी कमजोर लहरों पर पहुँचती है।
और हर “गुड नाईट”
एक लालटेन है,
जो मेरी अँधेरी रात में
तुम्हारी छाया फेंकती है।
हम जानते हैं—
हमारा शरीर यहाँ नहीं है,
पर हमारी तड़प
सौरमंडल की गति जैसी है।
एक पल भी
इस दूरी को स्वीकार नहीं कर सकता।
तुम्हारा ठंडा वाई-फाई
मेरी गर्म आँखों को जोड़ता है,
और मेरा हृदय
तुम्हारे संदेश की प्रतीक्षा में
निभाता है
एक अनंत संगीत।
हर कॉल, हर संदेश
एक पुल है,
एक अस्थायी किनारा,
जहाँ हम मिल सकते हैं
अथाह समुद्र के बीच।
फिर भी
तड़प आती है
कुछ हाथ जो छू नहीं सकते,
कुछ साँसें जो साझा नहीं हो सकतीं,
कुछ पल जो समय के
हवा में बिखर गए।
लेकिन यही दूरी
हमारे प्रेम को नए आकार देती है
यह प्रतीक्षा, यह उम्मीद,
यह डिजिटल धड़कन
हमें याद दिलाती है
कि प्रेम
सिर्फ़ देह की निकटता नहीं,
बल्कि अंतरिक्ष और समय में
बढ़ती हुई आवाज़ है,
एक अदृश्य,
पर अडिग पुल।
और जब हम अंततः मिलेंगे,
तब यह तकनीक नहीं होगी—
बल्कि हमारी तड़प
एक पूर्ण संगीत बन जाएगी।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,
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