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Saturday, 21 February 2026

दो रूहों का मिलन (समलैंगिक स्त्री की चाहत )

तेरी आँखों में डूबा हूँ मैं,

एक समंदर सा गहरा, रहस्यमय,

तेरी पलकों की छाँव में खोया,

जहाँ हवाएँ भी थम सी जातीं।

तेरी साँसें मेरी त्वचा चूमें,

गर्माहट सी फैले हर धड़कन में,

होंठों का स्पर्श, नरम फूलों सा,

मीठा जहर, जो रगों में घुल जाए।


तेरी उँगलियाँ मेरे बालों में उलझें,

धीरे-धीरे सरकें गर्दन की ओर,

कंधों पर बरसें बूँदें प्रेम की,

त्वचा जागे, सिहरन की लहरें उठें।

तेरी छाती से लगकर महसूस करूँ,

दिल की धुन, एक ही ताल पर नाचे,

नाभि की गहराई में खो जाएँ हम,

एक-दूसरे के साये में लिपटें।


तेरी जाँघें मेरी जाँघों से रगड़ें,

रेशमी चादर सा मुलायम स्पर्श,

कूल्हों की लय में डूबें रातें,

हर मोड़ पर नया आनंद जगे।

तेरी कमर को थामूँ मैं कसकर,

घुमाऊँ तुझे चक्रव्यूह में प्रेम का,

पैरों की उंगलियाँ एक-दूसरे में,

फिसलें, चूमें, बंधन बन जाएँ।


ओरों से अलग, बस हमारी दुनिया,

शरीर के हर कोने में बसें तू मैं,

तेरी नाभि में चूमूँ गहराई से,

तेरी पीठ पर लिखूँ कविता उँगलियों से।

स्तनों की मुलायम वादियों में खोया,

चूमूँ हर बूँद को, चाटूँ मीठास को,

तेरी सिसकियाँ गूँजें कमरे में,

मेरी साँसें तेरे होंठों पर बरसें।


रात की चादर में लिपटकर सोएँ,

तेरी भुजाओं में सिर रखूँ सहारा,

सुबह की पहली किरण चूमे जब तुझे,

मैं फिर जागूँ तेरे स्पर्श से।

दो रूहें, एक देह में बसीं,

लेस्बियन प्रेम की अनंत गाथा,

हर स्पर्श में ईश्वर का दर्शन,

हर सिसकी में मोक्ष की प्राप्ति।


तेरी आँखें बंद हों तो भी जानूँ,

तेरी हर हलचल, हर साँस की धुन,

मेरी उँगलियाँ तेरी नमी में डूबें,

गहराईयों को खोजें, मिलन का राग गाएँ।

कभी ऊपर, कभी नीचे सरकें,

हर रहस्य खोलें, हर द्वार पर चढ़ें,

चरम सुख की चोटी पर पहुँचकर,

फिर लौटें गले लगकर, नई शुरुआत करें।


यह प्रेम न कोई बंधन, न कोई नाम,

बस दो आत्माओं का नृत्य अनंत,

तेरे बिना अधूरी हूँ मैं,

तू मेरी पूर्णता, मेरा संसार।


मुकेश ,,,,,

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