लघु उपन्यास – दूसरा खंड
अध्याय – 04 : चाय का पैन और लेखक
कमरा आज भी शांत था।
तख़्त पर किताबें
अपनी-अपनी जगह पड़ी थीं।
अलमारी
अपने भीतर सदियों के विचार बंद किए बैठी थी।
झाड़ू
अब भी तख़्त के नीचे
गहरी नींद में थी।
पर रसोई के प्लेटफॉर्म पर
एक चीज़
हमेशा की तरह
सजग खड़ी थी
चाय का पैन।
मैंने कई बार सोचा है
अकेले रहने वाले
लेखकों, कवियों, विचारकों
और विद्यार्थियों के जीवन में
अगर कोई सबसे सच्चा साथी होता है
तो वह यही छोटा-सा
चाय का पैन होता है।
किताबें
विचार देती हैं।
दोस्त
बहस देते हैं।
पर
ऊर्जा
वह चाय देती है।
और चाय
इस छोटे-से पैन में ही जन्म लेती है।
मैंने गैस जलाई।
पानी डाला।
और पैन को स्टोव पर रख दिया।
कुछ ही क्षणों में
उसके भीतर
हल्की-सी खनखनाहट होने लगी।
जैसे वह
धीरे-धीरे जाग रहा हो।
मैंने मुस्कुराकर कहा
“तो दोस्त,
एक बार फिर तुम्हारी ड्यूटी शुरू।”
पानी
धीरे-धीरे गरम हो रहा था।
भाप उठने लगी।
मुझे लगा
जैसे पैन ने जवाब दिया हो—
“तुम्हारी भी तो।”
मैं थोड़ा चौंका।
फिर हँस पड़ा।
अकेले रहने वाले लोग
कभी-कभी
बर्तनों से भी बात करने लगते हैं।
पर सच कहूँ
कई बार
बर्तन भी जवाब देते लगते हैं।
मैंने चाय की पत्ती डाली।
पैन के भीतर
एक छोटा-सा तूफ़ान उठ गया।
भाप तेज़ हो गई।
पैन जैसे
थोड़ा गर्व से बोला
“देखा?
विचार भी ऐसे ही उबलते हैं।”
मैंने पूछा
“कैसे?”
पैन बोला
“पहले पानी जैसा शांत मन चाहिए।”
मैं ध्यान से सुनने लगा।
“फिर उसमें
अनुभव की पत्ती डालो।”
मैंने दूध डाला।
चाय का रंग बदल गया।
पैन बोला
“और फिर
जीवन का दूध।”
मैं हँस पड़ा।
“तो चीनी क्या है?”
पैन कुछ क्षण चुप रहा।
फिर बोला
“शायद
आशा।”
मैंने चम्मच से चाय हिलाई।
कमरे में
हल्की-सी खुशबू फैल गई।
मुझे अचानक लगा
सचमुच
लेखकों और विद्यार्थियों की आधी सभ्यता
चाय के पैन के आसपास ही बनी है।
कितनी किताबें
रात की चाय के साथ लिखी गई होंगी।
कितनी कविताएँ
भोर की चाय के साथ जन्मी होंगी।
कितने विचार
इस छोटे-से पैन की भाप में उठे होंगे।
मैंने चाय कप में डाली।
पैन अब शांत हो चुका था।
जैसे अपनी भूमिका पूरी करके
फिर से साधारण बर्तन बन गया हो।
मैंने कप हाथ में लिया।
खिड़की के पास आकर बैठ गया।
और सोचने लगा
दुनिया के बड़े-बड़े दर्शन
कभी-कभी
बहुत साधारण चीज़ों में छुपे होते हैं।
जैसे
एक छोटा-सा कमरा।
एक खुली किताब।
और
एक चाय का पैन।
मैंने चाय की पहली घूँट ली।
और मुझे लगा
आज का सबसे सच्चा दर्शन
शायद अभी-अभी
रसोई में उबला है।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,
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