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Thursday, 26 March 2026

पुरानी घिसी चटाई पर बैठा हुआ समय

 पुरानी घिसी चटाई पर बैठा हुआ समय


पुरानी घिसी चटाई पर

कोई बैठा है

ध्यान से देखो,

वो समय है।


किनारों से उधड़ी हुई,

बीच से थोड़ी मुलायम

जैसे उस पर

बहुत-सी दोपहरें

ठहरी हों।


लोग आते गए,

बैठते गए,

उठते गए

पर चटाई

सबको अपने भीतर

थोड़ा-थोड़ा रखती रही।


अब वो खाली है,

पर खाली नहीं

उसकी बुनावट में

किसी की हँसी,

किसी की थकान

अब भी अटकी है।


समय गुजरता नहीं,

वो ठहर-ठहर कर

हममें बसता है।


शायद इसलिए

वो चटाई

अब भी वहीं है

और समय

उस पर बैठा हुआ

धीरे-धीरे

खुद को बुन रहा है…।


मुकेश ,,,

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