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Thursday, 26 March 2026

एक दिन एहसास ने आकर दरवाज़ा खटखटाया

एक दिन एहसास ने आकर दरवाज़ा खटखटाया


एक दिन

एहसास ने

आकर दरवाज़ा खटखटाया


कोई आवाज़ नहीं थी,

बस

भीतर कुछ

हल्का-सा हिल गया।


मैंने सोचा

कौन होगा

पर नाम

कोई नहीं था।


दरवाज़ा खोला

तो सामने

कोई खड़ा नहीं था,

फिर भी

कोई था

जो भीतर चला आया।


कमरा वैसा ही रहा,

पर हवा बदल गई—

जैसे

ख़ामोशी ने

कुछ कह दिया हो।


मनोविज्ञान कहता है

कुछ अनुभव

दरवाज़े से नहीं आते,

वे सीधे

भीतर उतरते हैं।


उस दिन के बाद

मैं अकेला नहीं रहा

क्योंकि

कोई आया नहीं था,


फिर भी

कुछ

मेरे साथ रह गया…।


मुकेश ,,,,,,,,

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