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Saturday, 14 March 2026

तुम्हारी याद और शाम का अकेलापन

 तुम्हारी याद और शाम का अकेलापन

शाम ढल रही है,

और खिड़की से आती हवा

थोड़ी ठंडी है।

तुम्हारी याद

धीरे-धीरे

कमरे में फैल रही है,

जैसे

अकेलापन भी

उसके साथ बैठ गया हो।

कोई आवाज़ नहीं,

सिर्फ़

दिल की हल्की-सी धड़कन

और तुम्हारी याद का

सुकून।

शाम अब

ख़ाली नहीं—

तुम्हारी याद

उसमें रह गई है।

मुकेश्,,, 

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