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Saturday, 14 March 2026

शकुंतला और दुष्यंत

 शकुंतला और दुष्यंत

(कालिदास की काव्य-भावना से प्रेरित एक आधुनिक नज़्म)

वन की शांत छाया में

जब शकुंतला ने

किसी अनजाने पथिक को देखा

हवा

क्षण भर के लिए

रुक-सी गई थी।

दुष्यंत की आँखों में

राज्य का वैभव नहीं,

एक नई जिज्ञासा थी

और शकुंतला की

नत पलकें

वन के फूलों की तरह

धीरे-धीरे खिल रही थीं।

वक़्त बीतता गया,

राज्य और वन

अपने-अपने रास्तों पर चले गए

पर

प्रेम की वह पहली दृष्टि

आज भी

किसी ऋतु की तरह

कविता में लौट आती है।

मुकेश्,,,,, 

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