होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Saturday, 14 March 2026

अंगूठी खो जाने की जगह खोया हुआ संदेश

 अंगूठी खो जाने की जगह खोया हुआ संदेश


कभी

वन की पगडंडी पर

एक अंगूठी खो गई थी

और उसके साथ

स्मृति भी।


आज

नदी नहीं बहती,

न अंगूठियाँ गिरती हैं


बस

मोबाइल की स्क्रीन पर

कभी-कभी

एक संदेश

भीड़ में खो जाता है।


शायद

दुष्यंत ने

लिखा भी होगा कुछ,

पर

नेटवर्क की हलचल में

वह पहुँच नहीं पाया।


समय बदल गया है

पर भूल जाने की कहानी

अब भी

किसी न किसी रूप में

दोहराई जाती है।


कभी

अंगूठी खोती थी,

आज

एक संदेश।


मुकेश ,,,,

No comments:

Post a Comment