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Wednesday, 18 March 2026

ख़ुशबू की ख़ामोश ज़ुबान

 ख़ुशबू की ख़ामोश ज़ुबान


ख़ुशबू

कभी बोलती नहीं,

पर उसकी एक भाषा होती है।


वह भाषा

हवा के कंधों पर बैठकर

धीरे-धीरे

दिल तक पहुँचती है।


तुम्हारी साँसों की महक में

एक ऐसी ही ख़ामोश ज़ुबान है,


जो बिना शब्दों के

इतनी बातें कह देती है

कि कविता भी

कभी-कभी

चुप हो जाती है।


और तब लगता है

कि दुनिया की

सबसे सच्ची बातें

हमेशा

ख़ामोशी में कही जाती हैं।


मुकेश ,,,,

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