ब्रह्मांड : एक अनलिखा शोधपत्र
ब्रह्मांड
अब तक प्रकाशित नहीं हुआ
यह एक अनलिखा शोधपत्र है,
जिसकी प्रस्तावना
अभी भी विस्तार में है।
कहा जाता है
कि लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले
एक महाविस्फोट ने
स्थान और समय को
एक साथ जन्म दिया।
पर यह कथन भी
सिर्फ़ एक परिकल्पना है
समीकरणों में दर्ज,
पूर्ण सत्य नहीं।
कॉस्मिक माइक्रोवेव पृष्ठभूमि
उस आदिम ताप की क्षीण प्रतिध्वनि—
आज भी मापी जा सकती है,
मानो ब्रह्मांड
अपनी शैशव-धड़कन
अब तक सँजोए हुए हो।
डार्क मैटर
जो दिखाई नहीं देता,
पर आकाशगंगाओं को
बिखरने से बचाए रखता है।
डार्क एनर्जी
जो उन्हें
और दूर धकेलती जाती है।
दो अदृश्य समीकरण
जिनके बिना
यह शोध अधूरा है।
आकाशगंगाएँ
उस शोधपत्र के अध्याय हैं;
तारे
उसके उपशीर्षक।
निहारिकाएँ
फुटनोट्स की तरह
संकेत देती हैं—
कि सृजन एक निरंतर प्रक्रिया है।
ब्लैक होल
गंभीर टिप्पणियाँ हैं,
जहाँ प्रकाश भी
तर्क खो देता है।
इवेंट होराइज़न
एक सीमा-रेखा है
ज्ञान और अज्ञान के बीच।
और हम?
हम उस शोधपत्र के
चलते-फिरते संदर्भ हैं।
हमारी हड्डियों में कैल्शियम,
रक्त में लोहा,
श्वास में ऑक्सीजन—
सब किसी प्राचीन तारे की
आंतरिक भट्ठी में रचे गए।
इस प्रकार
मानव चेतना
ब्रह्मांड का आत्म-उद्धरण है
वह क्षण
जब पदार्थ
स्वयं को पढ़ने लगता है।
फिर भी
अनुत्तरित प्रश्न शेष हैं
स्थान की वक्रता,
समय का तंतु,
मल्टीवर्स की संभावना।
हर उत्तर
एक नया प्रश्न जन्म देता है।
इसलिए
ब्रह्मांड अभी भी
अनलिखा है
हम उसके सह-लेखक हैं,
दूरबीनें हमारी कलमें,
समीकरण हमारी स्याही।
और हर नई खोज
बस इतना कहती है
शोध जारी है।
मुकेश ,,,,,,,,,
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