“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
पुराना ताला और बिना चाबी का दरवाज़ा
दरवाज़े पर
लटका है
एक पुराना ताला।
चाबी
कब की खो गई है—
या शायद
किसी जेब में
भूलकर रह गई।
अंदर क्या है,
कोई ठीक से नहीं जानता,
बस अंदाज़े हैं
और थोड़ी-सी जिज्ञासा।
दरवाज़ा चुप है,
ताला भी चुप है—
जैसे
मुकेश्,,,
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