पानी में जलती हुई आग का रहस्य
पानी में आग जलती है—
कोई शास्त्र नहीं, कोई जादू नहीं,
बल्कि एक रहस्य है,
जो केवल देखने वालों को दिखता है।
लोग आते हैं, कहते हैं
“यह असंभव है,
जल और आग साथ नहीं रह सकते।”
पर मैं देखता हूँ
वह दोनों एक ही पल में मौजूद हैं,
जैसे विरोधाभास भी सच हो सकता है।
पानी ठंडा है,
और आग तेज़,
फिर भी वे खेलते हैं
एक अदृश्य सीमा पर
जहाँ संतुलन होता है
और विरोधाभास मिट जाता है।
यह वही सागर है,
जिसे ऋषियों ने देखा था
संसार की परतों में
हमारी इच्छाएँ और हमारी पीड़ा
एक साथ जलती और बहती हैं।
हम अपने कर्मों की आग में
डूबते हैं,
और फिर पानी की तरह
शांति की तलाश करते हैं।
हम डूबते हैं,
फिर उठते हैं
हमारी हर क्रिया
एक नई ज्वाला बनती है।
और इस खेल में
हम भूल जाते हैं
कि विरोधाभास ही जीवन है।
अधूरी इच्छाएँ
जलती हुई आग की तरह हैं,
जो पानी के भीतर
अदृश्य रूप से जीवित रहती हैं।
यह रहस्य सिखाता है
कि सत्य कभी केवल एक रूप में नहीं मिलता।
जो असंभव लगता है,
वह केवल हमारी दृष्टि का भ्रम है।
पानी में जलती हुई आग
हमें दिखाती है
कि जीवन में संतुलन
बल की नहीं,
समझ की मांग करता है।
हम जब इसे स्वीकार करते हैं,
तब डर नहीं,
बल्कि आश्चर्य और समझ
हमारे भीतर जागती है।
और तभी
हम देखते हैं
कि जल और आग,
अधूरी इच्छाएँ और कर्म,
सत्य और भ्रांतियाँ
सभी मिलकर
एक रहस्यपूर्ण नृत्य करते हैं।
शायद यही
संसार का सबसे बड़ा रहस्य है
पानी में जलती हुई आग,
और उसमें समा जाने वाला मन।
मुकेश ,,,,,
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