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Thursday, 5 March 2026

अस्तित्व और आलिंगन

 अस्तित्व और आलिंगन


बहुत बार

मैंने अस्तित्व को

एक विशाल प्रश्न की तरह देखा—

अनंत आकाश,

अनगिनत तारे,

और उनके बीच

एक छोटा-सा जीवन।


दर्शन ने कहा—

अस्तित्व

सिर्फ़ होने का तथ्य है।


विज्ञान ने कहा—

यह पदार्थ और ऊर्जा का

एक दीर्घ इतिहास है।


पर जब तुमने

मुझे अपने आलिंगन में लिया,

तो लगा

इन दोनों उत्तरों में

कुछ कमी है।


क्योंकि उस क्षण

सारी दूरियाँ

अचानक अर्थ खो देती हैं।


आकाश

इतना दूर नहीं लगता,

समय

इतना कठोर नहीं लगता।


जैसे

दो बाँहों के बीच

पूरा ब्रह्मांड

एक क्षण के लिए

ठहर गया हो।


तब समझ आता है—

अस्तित्व केवल

ब्रह्मांड का फैलाव नहीं,

किसी के पास होने की

गर्माहट भी है।


जहाँ

दो धड़कनें

एक लय में सुनाई देती हैं,

और जीवन

अपना अर्थ

थोड़ा और स्पष्ट कर देता है।


शायद इसलिए

दर्शन के सबसे बड़े प्रश्न भी

कभी-कभी

एक छोटे-से आलिंगन में

शांत हो जाते हैं।


क्योंकि वहाँ

अस्तित्व

सिर्फ़ विचार नहीं रहता—

वह

जीया हुआ सत्य बन जाता है।


मुकेश ,,,,,,,,

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