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Wednesday, 4 March 2026

खुले बालों में गुम हुआ रास्ता

 खुले बालों में गुम हुआ रास्ता

तुम्हारे खुले बालों में
कहीं एक रास्ता खो गया है
शायद वही
जो सीधा दिल तक जाता था।

लटें जब कंधों पर बिखरती हैं,
तो लगता है
जैसे पगडंडियाँ आपस में उलझ गई हों,
और मैं
हर मोड़ पर
तुम्हारा नाम पढ़ता रह जाऊँ।

हवा उन्हें छूकर निकलती है,
पर दिशा भूल जाती है
क्योंकि उन बालों की खुशबू में
एक अनजाना नगर बसता है।

मैंने कई बार चाहा
उस रास्ते को ढूँढ लूँ,
पर हर बार
कोई नई लट
एक नया मोड़ बना देती है।

तुम ज़रा-सा मुस्कुरा दो,
तो लगता है
मानचित्र बदल गया
और जो रास्ता गुम था,
वो शायद
जान-बूझकर छुपा था।

तुम्हारे खुले बालों में
गुम हुआ वह रास्ता
दरअसल खोना नहीं
एक धीमा-सा सफ़र है,
जहाँ मंज़िल से ज़्यादा
भटकना ही
सुंदर लगता है।

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