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Friday, 20 March 2026

जहाँ वक़्त ठहरकर आईना बन जाता है

 जहाँ वक़्त ठहरकर आईना बन जाता है

वक़्त की ख़ामोश ज़बान

वक़्त चलता रहता है

बिना आवाज़, बिना कदमों की आहट के।

पर कभी-कभी…

वो ठहरता भी है

हमारे भीतर।


उन लम्हों में,

वक़्त आगे नहीं बढ़ता

वो मुड़कर हमें देखता है,

जैसे पूछ रहा हो

“तुम कहाँ खो गए थे?”


यहाँ वक़्त कोई बहती नदी नहीं

एक आईना है,

जिसमें अतीत, वर्तमान और अधूरा भविष्य

एक साथ दिखाई देते हैं।


1. ठहराव के क्षणों से

कभी-कभी वक़्त रुकता नहीं—हम रुक जाते हैं, और वही ठहराव आईना बन जाता है।

एक पल ऐसा आता है, जब सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं होता—और वहीं से देखना शुरू होता है।

ठहरना हार नहीं—अपने भीतर लौटने का पहला दरवाज़ा है।

वक़्त जब धीमा पड़ता है, तो हम पहली बार खुद को साफ़-साफ़ देखते हैं।

भागते हुए जो छूट गया था—वो ठहरकर ही मिलता है।


2. अतीत की परछाइयों से

वक़्त कभी बीतता नहीं—वो बस रूप बदलकर हमारे भीतर रह जाता है।

कुछ यादें जाती नहीं—वे आईने की तरह बार-बार सामने आ जाती हैं।

मैंने अतीत को भुलाना चाहा—पर उसने मुझे याद दिलाना नहीं छोड़ा।

जो पल हम जी नहीं पाए—वो सबसे ज़्यादा देर तक हमारे साथ रहते हैं।

अतीत बोझ नहीं—एक अधूरा सबक है, जो पूरा होना चाहता है।


3. वर्तमान की सच्चाई में

जो अभी है—वही सबसे कठिन होता है, क्योंकि उसमें कोई कहानी नहीं होती।

वर्तमान आईना है—जिसमें हम बिना बहाने के दिखते हैं।

वक़्त का सच यही है—कि वो सिर्फ़ अभी में मौजूद है।

हम या तो पीछे अटके रहते हैं या आगे भागते हैं—इसलिए “अब” हमें अजनबी लगता है।

जब हम सच में वर्तमान में होते हैं—तो कोई डर नहीं बचता।


4. अधूरे भविष्य से

भविष्य कोई जगह नहीं—एक कल्पना है, जिसे हम वक़्त से पहले जी लेते हैं।

जो आने वाला है, उसका डर अक्सर हमारे आज को खा जाता है।

वक़्त ने सिखाया—कि हर आने वाला पल, पहले से तय नहीं होता।

भविष्य का सबसे बड़ा सच यही है—कि वो हमेशा अनजाना रहेगा।

जो होना है, वो होगा—पर जो है, उसे देखना ज़रूरी है।


5. वक़्त और आत्मा के बीच

वक़्त शरीर पर असर करता है—आत्मा पर नहीं।

आत्मा के लिए वक़्त कोई रेखा नहीं—एक गहराई है।

जब हम भीतर उतरते हैं—तो वक़्त का असर कम हो जाता है।

आत्मा में जो ठहरता है—वही असली वक़्त है।

वक़्त हमें बदलता नहीं—वो बस हमें दिखाता है कि हम क्या बन रहे हैं।

आईने के उस पार

इन पंक्तियों में, वक़्त को रोकने की कोशिश नहीं

बस उसे देखने की एक कोशिश है।

क्योंकि वक़्त…

जब भागता है, तो हम खो जाते हैं

और जब ठहरता है,

तो हम खुद से मिलते हैं।


और शायद…

यही मिलना

सबसे सच्चा आईना है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,


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