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Saturday, 14 March 2026

ऋतुओं के बदलते रंग और बदलते रिश्ते

 ऋतुओं के बदलते रंग और बदलते रिश्ते


ऋतुएँ बदलती हैं

धीरे-धीरे

पेड़ों के रंग बदल जाते हैं।


कभी

बसंत की हरियाली,

कभी

पतझड़ की ख़ामोशी।


वैसे ही

रिश्ते भी

समय के साथ

अपने रंग बदलते हैं।


कभी

बहुत पास होते हैं,

कभी

थोड़ी दूरी में

चुपचाप खड़े रहते हैं।


पर जैसे

हर पतझड़ के बाद

फिर से

बसंत लौट आता है—


शायद

रिश्तों में भी

कहीं

एक नई हरियाली

छुपी रहती है।


मुकेश ,

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