होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Wednesday, 11 March 2026

समय की उँगलियों के निशान

समय की उँगलियों के निशान

समय

कभी शोर नहीं करता,

वह बस

चुपचाप गुजरता है—

और जाते-जाते

सब पर

अपने उँगलियों के निशान छोड़ देता है।


दीवारों पर

हल्की-सी दरारों में,

किताबों के पीले पन्नों में,

और चेहरों की झुर्रियों में

उसकी खामोश लिखावट दिखाई देती है।


हम सोचते हैं

कि हमने बहुत कुछ संभाल कर रखा है

कुछ तस्वीरें,

कुछ खत,

कुछ अधूरे वादे।


पर समय

धीरे-धीरे

सब पर अपनी मुहर लगा देता है,

जैसे कोई कलाकार

अंत में

अपनी पहचान छोड़ देता हो।


कभी

वह निशान

मुस्कान बन जाते हैं,

कभी

एक हल्की-सी टीस,

और कभी

एक ऐसी ख़ामोशी

जिसे शब्द छू भी नहीं सकते।


फिर एक दिन

आईने के सामने खड़े होकर

अचानक महसूस होता है

कि समय

कहीं बाहर नहीं गुज़रा,

वह तो

हमारे भीतर से होकर

अपना रास्ता बना गया है।


और जो कुछ बचा है

वह बस

उन अदृश्य उँगलियों के निशान हैं

जो हमें याद दिलाते हैं

कि जीवन

दरअसल

समय की हथेली पर लिखा हुआ

एक मौन हस्ताक्षर है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

No comments:

Post a Comment