पुराने दिनों की नरम मोहब्बत
पुराने दिनों की
एक नरम मोहब्बत
न बहुत शोर था उसमें,
न बहुत वादे।
बस
कभी-कभी मिलने वाली
मुस्कान थी,
और चुपचाप
साथ चलती हुई बातें।
अब
वक़्त बहुत आगे बढ़ गया है,
पर दिल के किसी कोने में
वह मोहब्बत
अब भी
वैसी ही मुलायम पड़ी है।
मुकेश ,,,,,,,,
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