होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Saturday, 14 March 2026

शाम की हवा में तुम्हारी आहट

 शाम की हवा में तुम्हारी आहट


शाम ढल रही है,

और हवा में

तुम्हारी हल्की-सी आहट है।


पेड़ों की पत्तियाँ

धीरे-धीरे हिलती हैं,

जैसे

तुम्हारा नाम

चुपचाप दोहरा रही हों।


कोई दिखाई नहीं देता,

फिर भी

दिल को लगता है—


तुम

यहीं कहीं

पास से गुज़र गए हो।


मुकेश ,,,,,,,

No comments:

Post a Comment