शाम की हवा में तुम्हारी आहट
शाम ढल रही है,
और हवा में
तुम्हारी हल्की-सी आहट है।
पेड़ों की पत्तियाँ
धीरे-धीरे हिलती हैं,
जैसे
तुम्हारा नाम
चुपचाप दोहरा रही हों।
कोई दिखाई नहीं देता,
फिर भी
दिल को लगता है—
तुम
यहीं कहीं
पास से गुज़र गए हो।
मुकेश ,,,,,,,
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