किताब के पन्ने पर गिरा हुआ इश्क़
किताब के पन्ने पर
गिरा हुआ है
थोड़ा-सा इश्क़।
शायद
किसी नाम को पढ़ते-पढ़ते
दिल
अचानक
कहीं और चला गया।
शब्द वहीं हैं,
पर उनके बीच
एक नरम-सी
ख़ामोशी उतर आई है।
अब
पन्ना सिर्फ़ पढ़ा नहीं जाता—
उसमें
थोड़ा-सा
महसूस भी किया जाता है।
मुकेश्,,,,
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