होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Saturday, 14 March 2026

दुष्यंत की स्मृति और आधुनिक जीवन की व्यस्तता

 दुष्यंत की स्मृति और आधुनिक जीवन की व्यस्तता


सुबह से

शहर भाग रहा है

घड़ियों की सूइयों के साथ

लोग भी

तेज़-तेज़ चल रहे हैं।


काग़ज़ों, मीटिंगों

और फ़ाइलों के बीच

कहीं

एक पुरानी स्मृति

चुपचाप बैठी है।


कभी-कभी

अचानक

दुष्यंत को याद आता है

वन की वह दोपहर,

और शकुंतला की

धीमी-सी मुस्कान।


पर तभी

फ़ोन की घंटी

फिर बज उठती है,

और शहर

उसे

वापस अपने शोर में

खींच लेता है।


स्मृति

फिर भी

कहीं अंदर

ठहरी रहती है


जैसे

व्यस्त जीवन के बीच

एक छोटा-सा वन

अब भी

साँस ले रहा हो।


मुकेश ,,,,,,,

No comments:

Post a Comment